​सोने की शुद्धता, हॉलमार्क व रेट से सम्बन्धित जाने जानकारी !


सोने की शुद्धता, हॉलमार्क व रेट से सम्बन्धित जाने जानकारी !

तथा क्या बिल व शुद्धता से जुङी महत्वपूर्ण बाते !

जानिए क्या होता है हॉलमार्क? व ऐसे तय की जाती है सोने की शुद्धता

15 जनवरी 2021 से सिर्फ हॉलमार्क वाली ज्वेलरी की ही बिक्री के नियमो के साथ करते हुऐ उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया !

हॉलमार्किंग से सोने की शुद्धता की पहचान हो सकेगी|

सोना खरीदने और बेचने दोनों के लिए हॉलमार्किंग जरूरी होगी. 15 जनवरी 2020 से इस नियम को लागू कर दिया गया है. लेकिन, अगले साल यानी 15 जनवरी 2021 से यह नियम कानून में तब्दील किया गया !

आपको बता दें कि BIS हॉलमार्किंग किसी भी सोने की शुद्धता की पहचान है. इससे पहले 16 जून 2021 तक गोल्ड हॉलमार्किंग अपनी स्वेच्छा पर था. लेकिन अब इसे 1 जून 2022 से अनिवार्य कर दिया है. दरअसल, कई बार ग्राहकों को नकली सोना बेच दिया जाता है. लेकिन हॉलमार्क वाला सोना 100% प्रमाणित सोना होता है.

इन ग्रेडों को किया गया शामिल

इस बार सरकार ने हॉलमार्किंग का दूसरा चरण शुरू कर रही है, जिसमें हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दिया गया है और तीनों ग्रेडों को शामिल कर लिया गया है. यानी इसमें इस बार 20 कैरेट, 23 कैरेट और 24 कैरेट को शामिल किया गया है !

जून 2022 से लागू किये गये नए नियमों के मुताबिक ज्वैलर्स सोने के सिर्फ वही गहने बेच पाएंगे, जिन पर हॉलमार्किंग होगी. इसका मतलब यह हुआ कि 1 जून 2022 से सोने के सभी गहनों पर हॉलमार्किंग करना जरूरी किया गया है, भले ही वे गहने कितने भी कैरेट के हों. ज्वैलरी के अलावा सोने से बनी दूसरी कलाकृतियों या किसी और सामान पर भी यही नियम लागू होगा !

असली सोना 24 कैरेट का ही होता है, लेकिन इसके अभूषण नहीं बनते, क्योंकि वो बेहद मुलायम होता है. आभूषणों के लिए 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें 91.66 फीसदी सोना होता है.

ज्वेलरी खरीदते वक्त हॉलमार्क का निशान जरूर चेक करें.

अगर निशान न हो तो ज्वेलर से सवाल पूछ सकते हैं. वहीं, जरूरत पड़ने पर शिकायत भी कर सकते हैं. बिना हॉलमार्क वाली ज्वेलरी की शुद्धता का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है. साथ ही बेचने के वक्त सही दाम मिलना भी मुश्किल होता है. बिक्री के समय हॉलमार्क वाली ज्वेलरी का मूल्य मौजूदा बाजार भाव पर तय होती है. इसलिए हॉलमार्क सर्टिफिकेट वाली ज्वेलरी ही खरीदें.

हॉलमार्क शुद्धता

375 37.5 % शुद्ध

585 58.5 % शुद्ध

750 75.0 % शुद्ध

916 91.6 % शुद्ध

990 99.0 % शुद्ध

999 99.9 % शुद्ध

देशभर में ज्वेलर्स सिर्फ 22 कैरेट यानी 91.6 फीसदी और 18 कैरेट यानी 75 फीसदी शुद्धता वाली ज्वेलरी बेचते हैं. 22 कैरेट वाली ज्वैलरी पर 915 हॉलमार्क का चिह्न होता है. वहीं, 18 कैरेट की ज्वेलरी का सोना 75 फीसदी शुद्ध होता है.

सोना शुद्धता

24 कैरेट 99.9%

23 कैरेट 95.8%

22 कैरेट 91.6%

21 कैरेट 87.5%

18 कैरेट. 75%

17 कैरेट 70.8%

14 कैरेट 58.5%

9 कैरेट 37.5%

कैसे तय कर सकते हैं अपने सोने की कीमत

1 कैरेट सोने का मतलब होता है 1/24 फीसदी गोल्ड, अगर आपके आभूषण 22 कैरेट के हैं तो 22 को 24 से भाग देकर उसे 100 से गुणा करें. (22/24)x100= 91.66 यानी आपके आभूषण में इस्तेमाल सोने की शुद्धता 91.66 फीसदी.

खरीदने से पहले सोने का रेट की सही जानकारी प्राप्त करना बेहतर होता है !

समाचार पत्रो व टीवी इत्यादि पर अक्सर 24 कैरेट सोने के अनुसार का जिक्र होता है. मान लीजिए सोने का भाव 40000 रुपए है. बाजार में सोना खरीदने पर ध्यान रखें कि ज्वेलरी 22 कैरेट की मिलेगी. मतलब 22 कैरेट सोने का दाम (40000/24)x22=36,666.66 रुपए होगा. वहीं, ज्वेलर आपको 22 कैरेट सोना 40000 में ही देगा. मतलब आप 22 कैरेट सोना 24 कैरेट सोने के दाम पर खरीद रहे हैं.

ऐसे ही 18 कैरेट गोल्ड की कीमत भी तय होगी. (40000/24)x18= 30,000 जबकि ये ही सोना ऑफर के साथ देकर ज्वेलर ठगते हैं.

गहने खरीदें तो बिल जरूर लें

पक्के बिल में सोने की शुद्धता और रेट की सही जानकारी होती है तथा आवश्यक के साथ सुरक्षित है !

कैसा होता है असली बिल, रसीद में चेक करें ये बातें लिखी हैं या नहीं

रिटेलर या ज्वेलर से अगर हॉलमार्क्ड जेवर खरीदते हैं तो जरूरी है कि उससे प्रमाणित बिल या इनवॉयस जरूर लें. यह किसी भी प्रकार के विवाद, दुरुपयोग या शिकायत निपटारे के लिए जरूरी है. इसलिए यह जानना जरूरी है कि हॉलमार्क्ड ज्वेलरी का बिल कैसा होना चाहिए और उसमें किन-किन बातों का जिक्र जरूरी है.

बिल/चालान में हॉलमार्क वाली वस्तुओं की डिटेल होना जरूरी है. हॉलमार्क वाले कीमती धातु की वस्तुओं की बिक्री के बिल या चालान में हर वस्तु का विवरण -

कीमती धातु का शुद्ध वजन, कैरेट, शुद्धता और हॉलमार्किंग चार्ज का जिक्र किया जाना चाहिए. यह भी लिखा जाना चाहिए कि “उपभोक्ता हॉलमार्क वाले आभूषणों या कलाकृतिया को मान्यता प्राप्त स्थान से चैक करवा सकता है !

इस उदाहण से समझें

मान लें आप किसी जौहरी की दुकान से सोने का आभूषण खरीद रहे हैं. आपने 8 ग्राम और 22 कैरेट सोने की चेन खरीदी है. ऐसे में आपके बिल, इनवॉयस या चालान पर आपका जौहरी कुछ इस प्रकार लिखेगा-

आइटम का नाम और डिटेल: सोने की चेन

मात्रा: 1

वजन (ग्राम): 8 ग्राम

शुद्धता: 22KT

वर्तमान सोने की दर और मेकिंग चार्ज

हॉलमार्किंग शुल्क: 35 रुपये + जीएसटी

बिल कैसे व क्या क्या उल्लेख हो

आइटम का नाम और डिटेल: सोने की

-

मात्रा: -

वजन (ग्राम): - ग्राम

शुद्धता: -

सोने की दर और मेकिंग चार्ज

हॉलमार्किंग शुल्क: 35 रुपये + जीएसटी ( आप इस नियमानुसार चैकर करावे )

खरीदार द्वारा देय राशि इत्यादि,

कई दुकानदार ग्राहकों को कच्चा बिल या अस्थायी बिल भी देते हैं. इस बिल में सभी बातें दर्ज नहीं होतीं व आपको अनेक समस्याओ का सामना करना पङ सकता है व नही सुरक्षित व उचित है !

दूसरी ओर, एक स्थायी बिल या चालान पूरी तरह से वैध लेनदेन पर आधारित होता है और कई डिटेल देता है-

रामदेव पोटलिया ,

एडवोकेट,

राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर

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